जानिये Rights Issue शेयर्स क्या होते है और कंपनी Rights Issue शेयर्स क्यों लाती है

जानिये Rights Issue शेयर्स क्या होते है और कंपनी Rights Issue शेयर्स क्यों लाती है

जैसा की हमने आपको अपने पिछले पोस्ट में बोनस शेयर्स ,स्टॉक स्प्लिट के बारे में बताया है ,ठीक उसी  तरह उसी  से ही एक मिलता जुलता Corporate Action है जिसके बारे में हम आज बात करेंगे जो की है , Rights Issue,  ,Rights Issue शेयर क्या होते है ,राइट इशू meaning in stock market, कंपनियों द्वारा इन्हे क्यों लाये जाते है ,इससे निवेशक को क्या फायदा होता है ,आज हम इस पोस्ट के माध्यम से इन सभी के उत्तर जानने की कोशिश करेंगे ,आईये विस्तार में जानते है –

Rights Issue क्या होता है ?

Rights Issue जिसमे Rights  का मतलब होता है अधिकार, ठीक इससे पता चलता है की इसमें अधिकार की बात की जा रही ,कंपनी द्वारा Rights Issue जारी करके उसके  मौजूदा निवेशक को एक अधिकार दिया जाता है ,कि वह कंपनी में चाहे तो दोबारा निवेश कर सकते है ,

Rights Issue शेयर्स ऐसे शेयर्स होते है जिन्हे कंपनी द्वारा अपने मौजूदा निवेशक के लिए लाया जाता है ,जिसमे निवेश करने का अधिकार केवल उसके मौजूदा निवेशक को ही होता है ,

राइट इशू  लाने का अधिकार केवल  उन्ही कंपनियों’ को ही होता है जो पहले से शेयर बाजार में सूचिबदंड होती है ,यानी अगर कंपनी अभी शेयर बाजार में सूचिबदंड नहीं है तो वह कंपनी अपना  राइट इशू नहीं ला सकती ,

कंपनी का राइट इशू लाने का मकशद बाजार से पैसा जुटाना होता है ,जिसके बदले में कंपनी अपने मौजूदा  शेयरधारको को बाजार में चल रहे कंपनी के शेयर मूल्य से कम कीमत पर शेयर्स मुहैया करवाती है ,कंपनी अपने निवेशक को बाजार में चल रहे कंपनी के शेयर भाव से 5% या उससे अधिक डिस्काउंट में शेयर्स देने का ऐलान करती है ,

जब भी कोई कंपनी राइट इशू लेकर आती है तो वह उसे एक fixed Ratio या अनुपात में लाती है ,ताकि उसमे निवेश करने वाला निवेशक एक सिमित दायरे में निवेश कर सके आइये इसे उदहारण से समझते है  ,

कुछ महीने पहले Right issue Reliance आया था जिसमे Reliance Industry  मार्किट में राइटइशू लेकर आई थी ,जिसमे निवेशकों के लिए 1 :15 का अनुपात रखा गया  था ,जिसका मतलब है अगर किसी निवेशक के पास कंपनी के 15 शेयर्स है, तो वह राइट इशू कंपनी  का 1 शेयर डिस्काउंट पर ले सकता ,

Reliance Industries का Right issue  बाजार भाव से  14 फीसदी डिस्काउंट पर था ,जिसको निवेशक को तीन किस्तों में चुकाना था ,और यह भारत में सबसे बड़ा Right issue था, जिसमे  रिलायंस ने  बाजार से 53 ,125 करोड़ रूपए raise किये  थे और जिसकी वजह से रिलायंस अब  एक कर्ज़ा मुक्त कंपनी बन गयी है

नोट : मार्किट राइट इशू द्वारा किस अनुपात और डिस्काउंट में शेयर मिलेंगे ये निर्णय कंपनी के Board of Directors निर्धारित करते है ,जरुरी नहीं है हमेशा शेयर्स मिलने वाला अनुपात कम हो ,ये बिलकुल कंपनी पर निर्भर करता की उसे कितने अनुपात में शेयर्सबाजार से लाने है ,जब Vodafone का राइट इशू आया था तो उसका अनुपात 87:38 था और डिस्काउंट 56 %  था

Rights Issue शेयर्स क्यों लाये जाते है ?

कंपनी राइट इशू लाने का मकसद होता है पैसा जुटाना ,यह पैसा कंपनी अपनी growth करने या कर्जा कम करने या किसी कारण वर्श हो रही पैसो की कमी को पूरा करने के लिए लाती है ,लेकिन राइट इशू ही क्यो लाती ?

अब हम इसका जवाब जानेंगे ,जब भी कंपनी पहली बार शेयर बाजार से पैसा उठाती है ,तो उसे बाजार में सूचीबद्व होने के लिए उसे आईपीओ लाना पड़ता है ,जिससे की कंपनी अपने शेयर्स को बाजार में उतारती है ,और एक आम निवेशक उस कंपनी में कुछ पूंजी लगाकर निवेश कर पाता है ,और बदले में कंपनी अपने शेयर्स को पब्लिक करके बाजार से पैसा उठाती है,

अब अगर कंपनी पहले से ही स्टॉक मार्किट में सूचीबद्व है ,तो दोबारा मार्किट से पैसा उठाने के लिए  कंपनी दोबारा आईपीओ नहीं ला सकती क्यूंकि आईपीओ सिर्फ वो कंपनिया लेकर आती है जो पहले से शेयर बाजार में सूचीबद्व नहीं है  ,इसलिए जो पहले से सूचीबद्व कंपनी है वह बाजार से पैसा उठाने के लिए  FPO या Right Issue का सहारा लेती है.

FPO और Rights Issue में क्या फर्क होता है ?

FPO का पूरा नाम  Follow on Public Offer है ,ये बिलकुल आईपीओ की तरह होता है ,बस इसे केवल वही कंपनी ला सकती जो स्टॉक मार्किट में पहले से सूचीबद्व होती है ,

FPO और राइट इशू में  कई अंतर होते है ,लेकिन एक सबसे बड़ा मुख्य अंतर यह है कि इन दोनों Corporate Action में कौन निवेश कर सकता है ,कंपनी द्वारा राइट इशू  लाने में केवल उसके मौजूदा शेयरधारक ही निवेश कर सकते है ,जब्कि FPO में ऐसा नहीं है ,कंपनी जब FPO लाती है तो इसमें कोई भी निवेशक चाहे वो कंपनी का मौजूदा शेयरधारक हो या न हो निवेश कर सकता है

कंपनी द्वारा राइट इशू  लाने से उसमे निवेश करने वाले को निवेशक को शेयर्स जरूर मिलते है ,जबकि FPO में यह जरुरी नहीं है अगर FPO का subscription oversubscribe होता है ,मतलब कंपनी ने मार्किट में जितने शेयर्स उतारे है उससे शेयर्स की मांग होती है तो फिर शेयर्स का मिलना उस निवेशक के luck पर निर्भर करता है ,हालांकि जिन्हे  शेयर्स नहीं मिलते उनके पैसे जरूर रिफंड हो जाते है

FPO में निवेशक लोट में शेयर्स लेते है ,जबकि Rights Issue  में कंपनी के मौजूदा निवेशक एक पहले से फिक्स्ड अनुपात में शेयर्स लेते है,

यह थे कुछ अंतर ,अब हमारे दिमाग एक सवाल आता है की  जब FPO भी राइट इशू की तरह ही होता तो कंपनी ज्यातर Rights Issue ही क्यों लाती है ,इसका सरल सा जवाब है राइट इशू लाने की प्रक्रिया FPO के मुकाबले काफी सरल होती है और इसे लाने में FPO जितना खर्च नहीं आता ,और इस तरह कंपनी राइट इशू में अपने मौजूदा शेयर धारको को ही निवेश करने का अधिकार देकर उनके प्रति अपना आभार प्रकट करती है

शेयर धारको को इससे क्या लाभ होता है ?

राइट्स इश्यू  कंपनी द्वारा लाने से शेयर धारको को डिस्काउंट price पर शेयर्स मिल जाते है ,जो की बाजार में चल रही उस शेयर्स के price से कम होता है ,यह डिस्काउंट 5 % या उससे अधिक भी हो सकता है ,

जिसका मतलब यह है की अब आप निर्धारित समय के अंतराल में बाजार से कम कीमत पर राइट इशू लाने वाली कंपनी के शेयर्स ले सकते है,

नोट : यहां पर ध्यान देने वाली बात ये है की आपको जरूर पता होना चाहिए की कंपनी राइट इशू क्यों लेकर ला रही ,क्यूंकि अगर कंपनी का डेब्ट बढ़ चूका और केवल उसको कम करने के लिए कंपनी राइट इशू ला रही, तो क्या पता उस कंपनी का मार्किट शेयर price  डिस्काउंट शेयर price  से भी निचे चला जाए,लेकिन ऐसा ही हो यह जरुरी भी नहीं है 

कम राइट और एक्स राइट में क्या अंतर् है ?

कम राइट वह तिथि होती है ,जिसका ऐलान राइट इशू लाने वाली कंपनी द्वारा किया जाता है ,जिसमे कंपनी सुनिशित करती है ,की इस तिथि से पहले कंपनी के शेयर्स रखने वाले निवेशक को राइट इशू में निवेश करने का अधिकार है ,और राइट इशू जारी होने से पहले के शेयर प्राइस को कम राइट प्राइस कहा जाता है ,

एक्स राइट प्राइस :राइट इशू वाले शेयर्स जब निवेशक के डीमैट अकाउंट में आजाते है ,तो उस दिन चल रहे बाजार में शेयर भाव को एक्स राइट प्राइस कहा जाता है

क्या राइट इशू लाने वाली कंपनी का शेयरधारक राइट इशू में निवेश किये बिना राइट इशू का फायदा उठा सकता है ?

जी हाँ ,जब भी कंपनी द्वारा राइट इशू लाये जाते है तो वह दो प्रकार के होते है ,Renounce और दूसरा Non-Renounce,

Renounce राइट इशू में कंपनी आपको राइट देती है की आप चाहे तो आप अपने राइट इशू में शेयर्स लेने वाले राइट को बेच सकते है ,जबकि Non-Renounce में ऐसा नहीं होता है,आप अपने राइट को किसी और को नहीं बेच सकते,

तो यदि आपकी निवेश हुई कंपनी अगर  Renounce राइट इशू  जारी करती है  तो आप अपने राइट को स्टॉक मार्किट में ट्रेड करके उनसे पैसा कमा सकते है वो भी बिना कोई शेयर खरीदे हुए

निष्कर्ष :

जब भी कंपनी अपना अच्छी growth  कर रही हो ,और अपने व्यापार के विस्तार हेतु राइट इशू  ला रही हो ,तो इसमें निवेश करनाएक फायदा का सौदा साबित होता है ,

उम्मीद करते है ,आपको हमारी यह पोस्ट अच्छी लगी होगी ,अगर आपका पोस्ट से संबधित कोई सवाल या सुझाव है ,तो आप हमे कमेंट करके जरूर बताये

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