स्टॉक स्प्लिट क्या होता है और क्यों लाया जाता है ?
stock split kya hai

स्टॉक स्प्लिट क्या होता है और क्यों लाया जाता है ?

दोस्तों हमने अपने पहले के पोस्ट में बोनस शेयर का जिक्र किया की बोनस शेयर क्या होते है ,निवेशकों पर उसका क्या प्रभाव पड़ता है ,आज हम उसी से मिलता जुलता एक Corporate Action stock split के बारे में जानेंगे  ,ये Stock Split क्या है ? कैसे काम करता है ,क्या इसका निवेशकों पर प्रभाव पड़ता है ,आज हम इस पोस्ट के माध्यम से इन सभी सवालों के उत्तर देंगे आइए जानते है –

Stock Split क्या है – What Is Stock Split In Hindi

स्टॉक स्प्लिट का मतलब होता शेयर्स का विभाजन, जिस तरह split का हिंदी में मतलब किसी चीज़ का विभाजन होता है ठीक उसी तरह शेयर मार्किट में  स्टॉक स्प्लिट का मतलब शेयर्स का विभाजन होता है ,यह एक  Corporate Action है ,जो स्टॉक मार्किट में लिस्टेड कंपनियों द्वारा इच्छानुसार किया जाता है ,इसका मतलब जरुरी नहीं है की स्टॉक मार्किट में लिस्टेड हर एक कंपनी अपने स्टॉक स्प्लिट करेगी  ,स्टॉक स्प्लिट करने का फैसला कंपनी का निजी फैसला होता है

Stock Split कैसे काम करता है ?

कंपनियों द्वारा स्टॉक स्प्लिट शेयर्स को तोड़ने तथा बाजार में अपनी कंपनी के शेयर्स की संख्या को बढ़ाने के काम में आता है ,कंपनिया अपने शेयर्स को  किसी भी अनुपात 1,2,3,4 इत्यादि में स्प्लिट कर सकती है ,

जैसे हम stock split example से समझते है ,अगर कोई ABC कंपनी अपने स्टॉक को 1 :1 अनुपात में स्प्लिट करती है तो प्रत्येक व्यक्ति जो उस कंपनी का निवेशक है उसके शेयर्स का 1 :1 अनुपात में विभाजन हो जायगा और उसके प्रत्येक शेयर अब दो शेयर्स में तब्दील हो जायँगे

क्या Stock Split करने से कंपनी के मार्किट कैप पर कोई असर होता है ?

जी नहीं स्टॉक स्प्लिट करने से कंपनी के मार्किट कैप में कोई असर नहीं पड़ता ,जब कंपनी अपने स्टॉक को किसी अनुपात में स्प्लिट करती है ,तो उसी अनुपात में उसके प्रत्येक शेयर्स की मार्किट वैल्यू कम हो जाती है जैसे की हमने अपने पिछले उदाहरण में देखा की कंपनी ABC ने अपने शेयर्स को 1 :1 अनुपात में विभाजन करने का निर्णय लिया ,

मान लीजिये कंपनी के पास 10,000 शेयर्स है जिनमे प्रत्येक शेयर्स की मार्किट वैल्यू 1000 रूपए है ,इसी तरह कंपनी का मार्किट कैप 10,000*1000 =100,00000 यानी 1 करोड़ रूपए है ,अब जब कंपनी 1:1 अनुपात में शेयर्स को स्प्लिट करती है ,तो उसके शेयर्स की संख्या 20,000 हो जाएगी ,और प्रत्येक शेयर की मार्किट वैल्यू 1:1 अनुपात में  घटकर 500 रूपए हो जाएगी ,   20,000*500=100,00000 लेकिन उसका मार्किट कैप 1 करोड़ रूपए ही रहेगा

अब स्प्लिट से पहले जिस व्यक्ति के पास ABC कंपनी के 500 शेयर्स थे ,अब उसके शेयर्स की संख्या बढ़कर  1000 हो जाएंगी ,और उसके प्रत्येक शेयर्स की फेस वैल्यू भी अब आधी हो जाएगी

क्यों लाया जाता है Stock Split क्या इससे कंपनी या निवेशक को कोई फायदा होता है ?

कंपनी स्टॉक स्प्लिट क्यों करती है ,इसके  दो कारण हो सकते है ,जैसे की अपने कंपनी के शेयर्स को बढ़ाना ताकि और और लोग कंपनी के शेयर्स ले सके और दूसरा liquidity ,

जैसे जैसे कंपनी के शेयर्स के दाम बढ़ते है वैसे ही उसमे liquidity की दिक्कत आने लगती है ,liquidity का मतलब होता है शेयर्स को बेचना ,क्योंकि ज्यादातर लोग महंगे शेयर्स को नहीं ले सकते है ,जिस तरह MRF कंपनी का एक शेयर 60,000 रूपए का है अब हर कोई 60,000  रूपए का शेयर्स नहीं ले सकता ,जिस कारण MRF के शेयर्स में liquidity की दिक्कत रहती है क्योंकि उनके निवेशक को खरीदार मिलना मुश्किल हो जाता है ,

ठीक इसी प्रकार कंपनी liquidity की समस्या कम करने और शेयर्स की संख्या को बढ़ाने के लिए कंपनी अक्सर अपने स्टॉक को स्प्लिट करती है ,ताकि छोटे निवेशक भी इन कंपनियों के शेयर्स में निवेश कर सके

निवेशक को स्टॉक स्प्लिट्स से क्या फायदा होता ?,देखिये अब स्टॉक स्प्लिट्स के बाद निवेशक के शेयर्स की संख्या बढ़ जाती है और शेयर्स के दाम घट जाते है ,जिससे की नए निवेशक को कम दाम में कंपनी के शेयर्स मिल जाते है

स्टॉक स्प्लिट्स से liquidity भी बढ़ जाती है ,जिसका फायदा ये होता है की अब आप अपने कंपनी के शेयर्स आसानी से बेच सकते है ,और आपको खरीददार ढूंढ़ने या शेयर्स को बेचने में दिक्कत नहीं आती और liquidity बढ़ने से स्टॉक मार्किट में कंपनी के शेयर्स का वॉल्यूम भी बढ़ता है, और अगर डिमांड सप्लाई के साथ कंपनी की ग्रोथ भी अच्छी हो है तो पहले के मुकाबले अब आपके पास ज्यादा शेयर्स भी होते है और उनके दाम बढ़ने की दर स्टॉक स्प्लिट्स के पहले के मुकाबले अब अच्छी होती है

Note :वॉल्यूम शेयर्स के लेन देन को कहा जाता है अगर कोई एक बार शेयर खरीदता और बेचता है तो उसे 2 वॉल्यूम कहते है एक बेचने और दूसरा खरीदने के लिए अगर एक दिन में कंपनी के शेयर्स का वॉल्यूम 1000 है तो उसका मतलब उस कंपनी के शेयर्स को उस दिन 500 बार खरीदा और 500 बार बेचा गया है

Reverse stock split क्या होता है ?

Reverse स्टॉक स्प्लिट ,स्टॉक स्प्लिट के बिलकुल विपरीत होता है जिसमे शेयर्स को merge किया जाता है ,जिससे की कंपनी अपने शेयर्स के दाम बढ़ा  सके और बाजार में अपने शेयर्स की सँख्या को कम कर सके

बोनस शेरस और स्टॉक स्प्लिट्स में क्या अंतर है ?

बोनस शेयर्स और स्टॉक स्प्लिट्स में दो अंतर है –

  1. बोनस शेयर्स में कंपनी के शेयर्स को बढ़ाया जाता है ,जबकि स्टॉक स्प्लिट्स में मौजूदा शेयर्स को विभाजित किया जाता है
  2. बोनस शेयर्स लाने से कंपनी के शेयर्स की फेस वैल्यू कम नहीं होती वही स्टॉक स्प्लिट्स में फेस वैल्यू को कम किया जाता है

निष्कर्ष

आज के हमारी पोस्ट में स्टॉक स्प्लिट्स से जुडी ध्यान देनी वाली बाते यह है ,

  • Stock Split द्वारा कंपनी के कुल शेयर की संख्या में बढ़ोतरी की जाती है,
  • कंपनी द्वारा Stock Split किए जाने से कंपनी के मार्केट कैप पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा
  • Stock Split करने से कंपनी के शेयर का फेस वैल्यू कम हो जाता है,
Disclaimer : हम यहाँ पर किसी भी कंपनी का कोई  प्रचार नहीं कर रहे है ,और न ही आपको इनमे निवेश करने की कोई सलाह दे रहे है,निवेश करने का फैसला आपका अपना निजी होना चाहिए

 

तो दोस्तों आज हमने जाना की व्यापार में Stock Split क्या है ? What Is Stock Split In Hindi और इसका निवेशको पर क्या प्रभाव पड़ता है  ,आशा है आपको हमारी यह पोस्ट पसंद आई होगी ,अगर आपका कोई सुझाव है तो हमे हमे जरूर बताये

 

 

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